श्रीविष्णु

विष्णु सहस्रनाम होम

वैदिक यज्ञ एवं होम | Duration : 4 Hours 30 Minutes
Price Range: 7100 to 21000

About Puja

भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के  लिये हमारे धर्मग्रंथों  में श्री विष्णु सहस्रनाम होम  का उल्लेख प्राप्त होता है।  भगवान विष्णु के  इन दिव्य एक हजार नामों से आहुति प्रदान की जाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में चली आ रही समस्त परेशानियों का शमन शीघ्र ही हो जाता है। इस सहस्रनाम होम के प्रभाव से भक्त समस्त कष्टों से मुक्त होकर अपने जीवन को धन्य करता है । किसी के पास अवरूद्ध धन को प्राप्त करना तथा भौतिक सुखों को जीवन में स्थापित एवं स्थिर करने हेतु यह सरल उपाय है, साथ ही वर्तमान समय में किये गये पापों का मार्जन तथा पूर्वजन्म कृत अनिष्ट कर्मों से भी साधक को मुक्ति मिलती है।
इस होम को करने के पश्चात् व्यक्ति को मानसिक शान्ति और स्थिरता प्राप्त करने में लाभ होता है। यह होम साधक की समस्त आर्थिक सङ्कटों को दूर करता है,तथा घर परिवार में वित्तीय स्थिरता का प्रादुर्भाव कराता है।
इस होम के प्रभाव से समस्त भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

Benefits

विष्णु सहस्रनाम होम का माहात्म्य :-

  • विवाह एवं सन्तान सुख से सम्बन्धित बाधाओं की निवृत्ति होती है।
  • व्यावसायिक जीवन की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने वाली समस्याओं का शमन होता है।
  • भगवान विष्णु की कृपा तथा आशीर्वाद की प्राप्ति साधक को होती है, साथ ही समस्त मनोकामनाओं की पू्र्ति भी होती है।
  • इस होम के प्रभाव से साधक के घर में धन, सुख, समृद्धि का आगमन होता है तथा जीवन में विकास तथा उन्नति के नवीन दरवाजे खुल जाते  हैं।
  • इस होम के प्रभाव से आधि, व्याधि, पीड़ा, रोग, दुःख आदि सभी परेशानियां दूर होती हैं।
Process

विष्णु सहस्रनाम होम में  होने वाले प्रयोग या विधि

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा-सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं पूजन 
  13. रक्षाविधान, प्रधान देवता पूजन
  14.  पाठ विधान
  15. विनियोग,करन्यास, हृदयादिन्यास
  16. ध्यानम्, स्तोत्र पाठ
  17. पंचभूसंस्कार, अग्नि स्थापन, ब्रह्मा वरण, कुशकण्डिका
  18. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  19. घृताहुति, मूलमन्त्र आहुति, चरुहोम
  20. भूरादि नौ आहुति स्विष्टकृत आहुति, पवित्रप्रतिपत्ति
  21. संस्रवप्राश , मार्जन, पूर्णपात्र दान
  22. प्रणीता विमोक, मार्जन, बर्हिहोम 
  23. पूर्णाहुति, आरती, विसर्जन
Puja Samagri

वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री:-

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

हवन सामग्री एवं यज्ञपात्र :-

  • काला तिल 
  • जौ,चावल 
  •  कमलगट्टा, पंचमेवा 
  •  हवन सामग्री, घी,गुग्गुल
  • गुड़ (बूरा या शक्कर) ,गड़ी गोला 
  •  पान पत्ता, बलिदान हेतु पापड़
  • काला उडद 
  • पूर्णपात्र -कटोरी या भगोनी
  • प्रोक्षणी, प्रणीता, स्रुवा, शुचि, स्फय - एक सेट
  • हवन कुण्ड ताम्र का 10/10  इंच या 12/12 इंच 
  • कलश रखने के लिए मिट्टी का पात्र
  •  पिसा हुआ चन्दन 
  • नवग्रह समिधा
  •  हवन समिधा 
  •  घृत पात्र
  • कुशा
  • पंच पात्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2 , कटोरी - 5 ,लोटा - 2 , चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा , धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

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