विशेषतः विद्यार्थी बुद्धि, विवेक प्राप्ति हेतु करें श्री गजानन स्तुति

विशेषतः विद्यार्थी बुद्धि, विवेक प्राप्ति हेतु करें श्री गजानन स्तुति

।। श्री चन्द्रकृता गजानन स्तुति ।।

श्री गणेशपुराण के अन्तर्गत् त्रिविध तापों(आधिदैविक-आधिभौतिक-आध्यात्मिक )  के निवारण के निमित्त यह गजानन स्तुति श्रीचंद्रदेव द्वारा की गयी । इस लघु स्तुति का पाठ करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है ।    

नमामि देवं द्विरदाननं तं यः सर्वविघ्नं हरते जनानाम् । 
धर्मार्थकामांस्तनुतेऽखिलानां तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय ॥१॥

मैं उन गजाननदेव को नमस्कार करता हूँ, जो लोगों के समस्त विघ्नों का अपहरण करते हैं। जो सबके लिये धर्म, अर्थ और काम का विस्तार करते हैं, उन विघ्नविनाशन गणेश को नमस्कार है । 

कृपानिधे ब्रह्ममयाय देव विश्वात्मने विश्वविधानदक्ष ।
विश्वस्य बीजाय जगन्मयाय त्रैलोक्यसंहारकृते नमस्ते ॥२॥

हे कृपानिधे ! हे देव ! हे विश्व की रचना करने में कुशल ! आप विश्वरूप, ब्रह्ममय तथा विश्व के बीज हैं, जगत् आपका स्वरूप है। आप ही तीनों लोकों का संहार करने वाले हैं, आपको नमस्कार है । 

त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय ।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धे नित्यं निरीहाय नमोऽस्तु नित्यम् ॥३॥

तीनों वेद आपके ही स्वरूप - आपके ही तत्त्व के प्रतिपादक हैं, आप सम्पूर्ण बुद्धियों के दाता, बुद्धि के प्रकाशक और देवताओं के अधिपति हैं। हे नित्यबोधस्वरूप ! आप नित्य, सत्य और निरीह हैं, आपको सदा- सर्वदा नमस्कार है ।

॥ इति श्रीगणेशपुराणे श्री चन्द्रकृता गजाननस्तुतिः सम्पूर्णा ॥

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