त्रिविध तापों की शान्ति तथा सर्वदा रक्षा के लिए श्री शिव जटाजूट स्तुति

त्रिविध तापों की शान्ति तथा सर्वदा रक्षा के लिए श्री शिव जटाजूट स्तुति

।। श्री शिवजटाजूट स्तुति ।।

भगवान् शिव की यह स्तुति तीन श्लोकों में की गयी है । इस स्तुति में साधक भगवान् की जटाओं से प्रार्थना करता है की ये आपकी दिव्य एवं विशाल जटाएं जिनमें भगवती गंगा निरन्तर अवस्थित रहती हैं  मेरे लिए कल्याणकारी हों तथा मेरी सर्वविध रक्षा करने वाली हों । मेरे तापों का शमन करने वाली हों तथा मुझे शांति प्रदान करने वाली हों ।  

स धूर्जटिजटाजूटो जायतां विजयाय वः । 
यत्रैकपलितभ्रान्तिं करोत्यद्यापि जाह्नवी ॥१॥

जिस भगवान् शंकर के जटाजूट में रहने वाली गंगाजी उनके जटाजूट में पके हुए बाल की भ्रान्ति आज भी पैदा कर रही हैं-वह भगवान् धूर्जटि का जटाजूट आप लोगों के विजय के लिये हो ।

चूडापीडकपालसंकुलगलन्मन्दाकिनीवारयो
         विद्युत्प्रायललाटलोचनपुटज्योतिर्विमिश्रत्विषः ।
पान्तु त्वामकठोरकेतकशिखासंदिग्धमुग्धेन्दवो
         भूतेशस्य भुजङ्गवल्लिवलयस्त्रङ्‌नद्धजूटा जटाः ॥२॥

भगवान् शिव के सिर की जटा भुजंगरूपी लताओं की वलयरूपी माला से बँधी हुई है । उससे शिरोभूषण एवं कपाल से व्याप्त मन्दाकिनी के जल की धारा निकल रही है । शिव के ललाटप्रदेश में स्थित नेत्र से बिजली की-सी ज्योति छिटक रही है। उस अवस्था में सुन्दर चन्द्रमा में केतकी के छोटे-से सुकोमल फूल का भ्रम हो जाता है। ऐसा भगवान् शंकर का वह जटाजूट आप सबकी रक्षा करे ।

गङ्गावारिभिरुक्षिताः फणिफणैरुत्पल्लवास्तच्छिखा- 
         रत्नैः कोरकिताः सितांशुकलया स्मेरैकपुष्पश्रियः ।
आनन्दाश्रुपरिप्लुताक्षिहुतभुग्धूमैर्मिलद्दोहदा
         नाल्पं कल्पलताः फलं ददतु वोऽभीष्टं जटा धूर्जटेः ॥३॥

धूर्जटि भगवान् शंकर की जटा निरन्तर गंगाजल से अभिषिक्त हो रही है । साँपों के फणों के कारण जटाका  अग्रभाग ऊपर उठे हुए पल्लवों की भाँति प्रतीत हो रहा है। साँपों के फणों में लगी हुई मणियों की ज्वाला जटाप्रदेश में विखरित हो रही है। चन्द्रमा की किरणों के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो विकसित पुष्पों की छटा बिखरी हुई हो । आनन्दाश्रुओं से परिपूरित होने के कारण अग्निरूपी नेत्र से निकलती हुई धूम्रशिखा के समान, कल्पतासदृश समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाली भगवान् धुर्जटि (शिव) की जटा आप लोगों को समस्त अभीष्ट प्रदान करें ।  

॥ इति श्रीशिवजटाजूटस्तुतिः सम्पूर्णा ॥ 

वैदिक पद्धति से विशिष्ट पूजा-पाठ, यज्ञानुष्ठान, षोडश संस्कार, वैदिकसूक्ति पाठ, नवग्रह जप आदि के लिए हमारी साइट vaikunth.co पर जाएं तथा अभी बुक करें ।

Vaikunth Blogs

शिवाथर्व से मिलती है साठ हजार गायत्री, एक लाख रुद्रमन्त्र, दस हजार प्रणव जप का फल
शिवाथर्व से मिलती है साठ हजार गायत्री, एक लाख रुद्रमन्त्र, दस हजार प्रणव जप का फल

।। शिवाथर्वशीर्षम् ।। भगवान् आशुतोष की आराधना में शिवाथर्वशीर्षम् का एक विशिष्ट स्थान है । कलेवर...

दरिद्रता, दुःख, दुर्भाग्य से मुक्ति प्राप्ति हेतु करें दारिद्र्यदहन शिव स्तोत्र का पाठ
दरिद्रता, दुःख, दुर्भाग्य से मुक्ति प्राप्ति हेतु करें दारिद्र्यदहन शिव स्तोत्र का पाठ

।। दारिद्र्यदहन शिव स्तोत्रम् ।। महर्षि वशिष्ठजी द्वारा विरचित इस स्तोत्र में कुल नौ (09) श्लोक ह...

पञ्चक्लेशों की शान्ति तथा अपरिमित आनन्द की प्राप्ति के लिए करें इस स्तोत्र का पाठ
पञ्चक्लेशों की शान्ति तथा अपरिमित आनन्द की प्राप्ति के लिए करें इस स्तोत्र का पाठ

।। काशीपञ्चकम् ।। श्रीमत् शंकराचार्य जी द्वारा विरचित इस स्तोत्र में पञ्च श्लोक हैं । काशी भगवान्...

समस्त दु:खों का नाश तथा कष्टों के निवारण हेतु करें श्री शङ्कराष्टकम् स्तोत्र पाठ
समस्त दु:खों का नाश तथा कष्टों के निवारण हेतु करें श्री शङ्कराष्टकम् स्तोत्र पाठ

।। श्री शङ्कराष्टकम् ।। श्रीयोगानन्दतीर्थविरचित यह स्तोत्र आठ श्लोकों में आबद्ध है । इन श्लोकों क...

वैभव-लक्ष्मी, यश, ऐश्वर्य आदि की स्थिरता के लिए करें शिवतांडव स्तोत्र से शिवोपासना
वैभव-लक्ष्मी, यश, ऐश्वर्य आदि की स्थिरता के लिए करें शिवतांडव स्तोत्र से शिवोपासना

भगवान् शिव के परम तेजस्वी भक्त रावण के द्वारा विरचित है । रावण भगवान् शिव की आराधना करता था इसलिए भग...

विद्या प्राप्ति एवं रोग-व्याधि की निवृत्ति हेतु करें, यह शिव स्तुति
विद्या प्राप्ति एवं रोग-व्याधि की निवृत्ति हेतु करें, यह शिव स्तुति

।। अन्धककृत शिवस्तुति  ।।  श्री स्कन्दपुराण के अवन्तीखण्ड में अन्धककृत यह स्तुति की गयी है । इस स...

 +91 |

By clicking on Login, I accept the Terms & Conditions and Privacy Policy

Recovery Account