Book Pandit for Personalized Puja Experience

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श्रीगणपति सहस्रनाम स्तोत्र

2100 to 21000

 सच्चिदानन्द स्वरूप भगवान् गजानन की अङ्गकान्ति सिन्दूर के समान है, उनकी चार भुजाएँ तथा वो  लम्बोदर हैं,

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अक्षरारम्भ (अक्षरज्ञान)

11000

इस संस्कार को लोक व्यवहार में विद्यारम्भ संस्कार अथवा पाटी पूजन के नाम से भी जाना जाता है।

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विवाह संस्कार

51000

  विधि पूर्वक समावर्तन संस्कार के पश्चात् विवाह संस्कार का क्रम है, जो समस्त संस्कारों में प्रमुख है

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मधुसूक्त (मधुविद्या) पाठ एवं हवन

12000

इस सूक्त का दर्शन अथर्ववेद के नवम् काण्ड में होता है।

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अभ्युदयसूक्त पाठ एवं हवन

11000

भगवान् वादरायण (वेदव्यास) के अन्तेवासी शिष्य महर्षि जैमिनी  के द्वारा प्रणीत पूर्वमीमांसा दर्शन में अभ्युदय

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दीर्घायुष्यसूक्त पाठ एवं हवन

11000

दीर्घायु प्रदान करने वाले इस सूक्त का पाठ अथर्ववेद की पैप्पलाद शाखा में उपलब्ध होता है

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ओषधिसूक्त पाठ एवं हवन

12000

ओषधि सूक्त का पाठ ऋग्वेद में उपलब्ध होता है।

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समावर्तन संस्कार

9000

 यज्ञोपवीत संस्कार के बाद  वेदारम्भ संस्कार तथा जब शिक्षा पूर्ण हो जाती थी,

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रोगनिवारणसूक्त पाठ एवं हवन

11000

रोगनिवारण सूक्त का पाठ ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में उपलब्ध होता है।

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