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अभय प्राप्ति

अभय प्राप्तिसूक्त पाठ एवं हवन

  अभय प्राप्तिसूक्त समग्र भयों से मुक्ति प्राप्त कराने वाला है।

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मधुसूक्त

मधुसूक्त (मधुविद्या) पाठ एवं हवन

इस सूक्त का दर्शन अथर्ववेद के नवम् काण्ड में होता है।

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गणपत्यथर्वशीर्ष

अभ्युदयसूक्त पाठ एवं हवन

भगवान् वादरायण (वेदव्यास) के अन्तेवासी शिष्य महर्षि जैमिनी  के द्वारा प्रणीत पूर्वमीमांसा...

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ओषधिसूक्त

ओषधिसूक्त पाठ एवं हवन

ओषधि सूक्त का पाठ ऋग्वेद में उपलब्ध होता है।

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रोगनिवारणसूक्त

रोगनिवारणसूक्त पाठ एवं हवन

रोगनिवारण सूक्त का पाठ ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में उपलब्ध होता है।

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गोसूक्त

गोसूक्त पाठ एवं हवन

गोसूक्त का पाठ अथर्ववेद के चतुर्थ काण्ड में उपलब्ध होता है।

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पृथ्वीसूक्त

पृथ्वीसूक्त पाठ एवं हवन

पृथ्वी सूक्त का पाठ अथर्ववेद के 12 वें काण्ड में उद्धृत हैं, इन मन्त्रों के द्रष्टा अथर्वा...

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वरुणसूक्त

वरुणसूक्त पाठ एवं हवन

ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 25 वें सूक्त को वरुणसूक्त कहते हैं।

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इन्द्रसूक्त पाठ

इन्द्रसूक्त पाठ एवं हवन

 इन्द्र सूक्त के ऋषि अप्रतिरथ है, देवता इन्द्र तथा छन्द त्रिष्टुप है।

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पवमानसूक्त

पवमानसूक्त पाठ एवं हवन

अथर्ववेद की पैप्लादशाखा में पठित 21 मन्त्रों को पवमान सूक्त के नाम से जाना जाता है।

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अग्निसूक्त

अग्निसूक्त पाठ एवं हवन

ऋग्वेद में लगभग 200 सूक्तों के द्वारा अग्निदेव का स्तवन  किया गया है।

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सूर्यसूक्त

सूर्यसूक्त पाठ एवं हवन

 यह सूक्त ऋग्वेद में उपलब्ध है। सूर्यसूक्त के ऋषि कुत्स -आङ्गिरस ,देवता सूर्य तथा त्रिष्टु...

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रुद्रसूक्त

रुद्रसूक्त [शिवसूक्त,नीलसूक्त] पाठ एवं हवन

भूतेश्वर भगवान् शिव की प्रसन्नता के लिए रुद्रसूक्त के पाठ का अनिर्वचनीय फलश्रुति है।

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श्रीभवानीसहस्रनामस्तोत्र

श्री भवानी सहस्रनाम स्तोत्र

भवानी अर्थात् संसार की पालनकर्तृ माता पार्वती। माता के एक हजार नामों का समायोजन श्रीभवानीस...

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श्रीराम

श्री राम सहस्रनाम स्तोत्र

'रमन्ते योगिनो अस्मिन् इति रामः' अर्थात् योगीजन जिसमें रमण करते हैं,

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श्रीदुर्गासहस्र

श्री दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र

आद्यशक्ति माँ  जगदम्बा जिन्हें दुर्गा कहा जाता है, उनकी शक्ति अनिर्वचनीय एवं अवर्णनीय है।

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श्रीशिव

श्री शिव सहस्रनाम स्तोत्र

  भगवान् शिव नित्य, अजन्मा, अनादि,अनन्त, निर्विकार एवं सर्वोपरि परात्पर तत्व हैं।

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श्रीविष्णु

श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र

 सर्वव्यापक परब्रह्म परमात्मा ही भगवान् विष्णु हैं। समस्त विश्व में व्याप्त होने के कारण इ...

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