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Per Vedic Rituals

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Most Popular Puja

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Satyanarayan

सत्यनारायण पूजा

 अद्वितीय परब्रह्म परमात्मा का स्वरूप सत्य है, हम सभी आपकी शरण ग्रहण करते हैं।

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गणपत्यथर्वशीर्ष

जन्मोत्सव पूजा

मानव जीवन- स्वास्थ्य रक्षण पूर्वक दीर्घायु एवं समृद्धि वैभव युक्त रहे, इसके लिए सनातन वैदि...

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विवाह संस्कार

विवाह संस्कार

  विधि पूर्वक समावर्तन संस्कार के पश्चात् विवाह संस्कार का क्रम है, जो समस्त संस्कारों में...

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Rudrapuja

रुद्राभिषेक एवं शिवाराधन

  वेद परब्रह्म परमात्मा का नि:श्वास एवं साक्षात् नारायण का स्वरूप है -"वेदो नारायणः साक्षा...

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शिला स्थापन

भूमि पूजन एवं शिला स्थापन

कल्याणकामी मनुष्यों को ऋषि महर्षियों द्वारा प्रतिपादित शास्त्रों के वचनानुसार कर्तव्य पालन...

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vastu dosh

वास्तुदोष शान्ति

गृह, मन्दिर, कार्यालय, औषधालय नवीन या प्राचीन किसी भी संस्था में सम्पूर्ण निर्माण

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अखण्ड रामायण पाठ (रामचरितमानस)

अखण्ड रामायण पाठ (रामचरितमानस)

श्री रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास जी महराज द्वारा रचित प्रसिद्ध धर्मग्रन्थ है।

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pitradosh

पितृदोष निवारणार्थ तर्पण

जन्म-जन्मान्तर के उपार्जित प्रारब्ध के अनुसार मनुष्य जन्म लेता है ।

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पाशुपतास्त्र

पाशुपतास्त्र स्तोत्र पाठ

हमारे वेदों एवं पुराणों में अनेक  स्त्रोत,मन्त्र आदि प्राप्त होते हैं, 

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नारायण कवच

श्री नारायण कवच पाठ एवं हवन

 महर्षि वेदव्यास कृत यह कवच श्रीमद्भागवत् पुराणान्तर्गत् षष्ठ स्कन्ध के आठवें अध्याय में व...

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अमोघ शिवकवच

अमोघ शिवकवच

यह  कवच श्रीस्कन्द पुराण के ब्रह्मोत्तर खण्ड में वर्णित है।

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सुन्दरकाण्ड पाठ

सुन्दरकाण्ड पाठ

गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा विरचित श्रीरामचरितमानस सप्त काण्डों में विभक्त है,जिसका पञ्चम...

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नामकरण

नामकरण संस्कार

इस जगत् में समस्त व्यक्ति, वस्तु एवं स्थान की कुछ ना कुछ संज्ञा होती है ।

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सौभाग्य प्रदायक

सौभाग्य प्रदायक चतुर्थी कर्म

विवाह के पश्चात् तीन रात पर्यन्त वर वधू को विशेष नियमों का पालन करते हुए चौथी रात्रि में ह...

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सूर्याथर्वशीर्षम्

सूर्याथर्वशीर्षम्

भगवान् सूर्य को वेदों में चराचर जगत् का आत्मा कहा गया है।

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नारायणाथर्वशीर्षम्

नारायणाथर्वशीर्षम्

नर शब्द जीव का वाचक है, नार= जीवों के समूह और उन जीवों का अयन (आश्रय) परमेश्वर हैं,

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देव्यथर्वशीर्षम

देव्यथर्वशीर्षम्

जिस प्रकार भक्ति के बिना भक्तिमान् (भक्त)की कल्पना नहीं की जा सकती ,

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शिवाथर्वशीर्षम्

शिवाथर्वशीर्षम्

"वेद: शिव: शिवो वेद:" वेद शिव हैं और शिव वेद हैं,

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