श्रीविष्णु

श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र

सहस्रनाम स्तोत्र पाठ | Duration : 3 Days
Price Range: 7100 to 21000

About Puja

         सर्वव्यापक परब्रह्म परमात्मा ही भगवान् विष्णु हैं। समस्त विश्व में व्याप्त होने के कारण इन्हें विष्णु संज्ञा दी गयी है। समस्त जगत् के ये संचालक तथा निर्गुण एवं सगुण दोनों भक्तों के उपास्य हैं। समस्त ब्रह्माण्डीय ज्ञान, भगवान् विष्णु में समाहित हैं। अपने चारों भुजाओं में शङ्ख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं इसके अलावा कौस्तुभमणि, श्रीवत्स ,शार्ङ्ग-धनुष, वैजयन्ती माला जो (पञ्चरत्नों से निर्मित है) खङ्‌ग, बाण आदि समयानुसार विभिन्न आयुधों को धारण करते हैं। भगवान् विष्णु का स्वरूप अत्यन्त शान्त, शेषनाग पर शयन तथा नाभि में कमल जो ब्रह्मा जी का भी उत्पादक (जनक) है,  विश्व ब्रह्माण्ड के आधार, आकाश सदृश सर्वत्र व्याप्त, नील मेघ के समान वर्ण, माता लक्ष्मी के आराध्य कमल सदृश नयनों वाले, योगीजन जिनका ध्यान करते रहते हैं, ऐसे परमात्मा भगवान् विष्णु का  स्वरूप साधक के समक्ष कृपा करुणा करने के लिए नित्य विद्यमान रहता है।

        भगवान् विष्णु परमार्थ तत्व हैं तथा भक्त इन्हें वासुदेव, परमात्मा, अच्युत, कृष्ण, हिरण्यगर्भ आदि नामों से पुकारते हैं। इन्हीं के विभिन्न अवतार मत्स्य, कूर्म, वाराह, वामन, हयग्रीव, श्रीराम, श्रीकृष्ण आदि हैं। ये विभिन्न अवतार अपनी दया, करुणा, कृपा आदि की वर्षा अकारण ही भक्तों पर किया करते हैं। जो भक्त भगवान् विष्णु के नाम का कीर्तन, स्मरण, अर्चन, दर्शन,वन्दन, गुणों का श्रवण, पूजन आदि करता है, उसके सभी पाप ताप नष्ट हो जाते हैं। भगवान् विष्णु अनन्त गुणों के आगार हैं, लेकिन भक्तवत्सलता सर्वोपरि है। आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी, और ज्ञानी इन चारों भक्तों की भावना को पूर्ण करते हैं। भगवान् विष्णु के उपासना के लिए विभिन्न शास्त्रों में विधान है जिसमें श्रीभगवान् वेदव्यास कृत महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म युधिष्ठिर सम्वाद प्राप्त होता है। धर्मराज युधिष्ठिर जी के प्रश्न करने पर गङ्गापुत्र पितामह भीष्म जी ने भगवान् विष्णु के सहस्रनामों को उद्घाटित एवं उद्भाषित किया है,जिसके पाठ की अनन्त महिमा है।

Benefits

श्रीविष्णुसहस्रनाम पाठ, अर्चन एवं हवन का माहात्म्य :-

  • विधिनिषेध पूर्वक भगवान् विष्णु का सहस्रनाम पाठ समस्त अमङ्गलों की निवृत्ति करता है।
  • शास्त्र विधि का अनुसरण कर, पाठ कराने से ब्राह्मण वेदज्ञ (वेदों का ज्ञाता) क्षत्रिय विजयी, वैश्य धन धान्य से समृद्ध तथा शूद्र सुख की प्राप्ति के साथ ही चारो वर्ण वैभव से युक्त होते हैं।
  • शुद्ध एवं स्पष्ट पाठकों को या कराने वालों को उत्तम पुत्र की प्राप्ति तथा अर्थार्थी (धन के इच्छुक) को अक्षय धन की प्राप्ति होती है।
  • विष्णु सहस्रनाम नाम के द्वारा आराधक को समस्त भयों से निवृत्ति तथा अचल सम्पदा (सम्पत्ति या लक्ष्मी) का लाभ प्राप्त होता है।
  • रोगी के लोग की निवृत्ति,समस्त बन्धनों से मुक्ति तथा आपत्तियों का विनाश होता है।
  • श्रद्धायुक्त पाठ से समस्त अमङ्गलों की हानि (समाप्ति) तथा मङ्गलों की प्राप्ति होती है।
  •  सर्वत्र पराभव (पराजय) से मुक्ति अर्थात् उपासक या उपासना करने या कराने वाले का किसी भी भाँति पराजय नहीं होती।
Process

श्रीविष्णु सहस्रनाम स्तोत्रपाठ अर्चन एवं हवन प्रयोग या विधि:

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं  पूजन 
  13. रक्षाविधान 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. विनियोग,करन्यास, हृदयादिन्यास
  16. ध्यानम्, स्तोत्र पाठ
  17. पंचभूसंस्कार, अग्नि स्थापन, ब्रह्मा वरण, कुशकण्डिका
  18. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  19. घृताहुति, मूलमन्त्र आहुति, चरुहोम
  20. भूरादि नौ आहुति स्विष्टकृत आहुति, पवित्रप्रतिपत्ति
  21. संस्रवप्राशन, मार्जन, पूर्णपात्र दान
  22. प्रणीता विमोक, मार्जन, बर्हिहोम 
  23. पूर्णाहुति, आरती, विसर्जन
Puja Samagri

 वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

हवन सामग्री एवं यज्ञपात्र :-

  • काला तिल 
  • जौ,चावल 
  •  कमलगट्टा, पंचमेवा 
  •  हवन सामग्री, घी,गुग्गुल
  • गुड़ (बूरा या शक्कर) ,गड़ी गोला 
  •  पान पत्ता, बलिदान हेतु पापड़
  • काला उडद 
  • पूर्णपात्र -कटोरी या भगोनी
  • प्रोक्षणी, प्रणीता, स्रुवा, शुचि, स्फय - एक सेट
  • हवन कुण्ड ताम्र का 10/10  इंच या 12/12 इंच 
  • कलश रखने के लिए मिट्टी का पात्र
  •  पिसा हुआ चन्दन 
  • नवग्रह समिधा
  •  हवन समिधा 
  •  घृत पात्र
  • कुशा
  • पंच पात्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2 , कटोरी - 5 ,लोटा - 2 , चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा , धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

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