धन्वन्तरि त्रयोदशी (धनतेरस पर्व)

धन्वन्तरि त्रयोदशी (धनतेरस पर्व)

व्रतोत्सव त्यौहार | Duration : 3 Days
Price Range: 4100 to 9100

About Puja

मासों में सर्वोत्तम कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी  धनतेरस या धनत्रयोदशी पर्व के नाम से जानते  हैं। भगवान् धन्वंतरि का प्रादुर्भाव त्रयोदशी के दिन हुआ । इसी कारण से  समस्त देशवासी बड़ी ही  भक्तिभाव से भगवान् धन्वन्तरि का पूजन एवं दीपदान करते हैं। भगवान् धन्वन्तरि स्वयं श्री नारायण के स्वरूप माने जाते हैं । भगवान् के अनेकों स्वरूप जिनमें से एक धन्वन्तरि हैं इनका प्रादुर्भाव जब समस्त विश्व में असुरों का आधिपत्य स्थापित हो गया था और देवताओं को पराजित कर राजा बलि स्वर्ग के राजा बन इन्द्रासन पर आरूढ़ थे, उस समय  पराजित देवता भगवान् विष्णु के पास पहुंचते हैं भगवान्  की स्तुति करते हैं स्तुति करने के बाद भगवान् से प्रार्थना करते हैं की प्रभु कुछ उपाय करे  जिससे मेरी रक्षा हो सके और  हमें पुनः अपने स्वर्ग की प्राप्ति हो। देवों की बात सुनकर भगवान् विष्णु ने  देवताओं से कहा कि जब  आप समस्त देव और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन  होगा ,इसके फलस्वरुप आप सब का कल्याण होगा । 

 देव और दानवों ने  मिलकर समुद्र मंथन किया जिसमें सर्वप्रथम हलाहल (कालकूट) जो भगवान् भूत भावन भोलेनाथ जी ने पान किया इसी प्रकार 14 रत्न निकले  देव और दानवों  के मध्य  बांट लिये गये इसके उपरान्त  भगवान् धन्वंतरि रूप में  प्रकट हुए। जिनके हाथों में अमृत कलश था।   इसी कार्तिक त्रयोदशी के दिन भगवान् धन्वंतरि का   प्रदुर्भाव हुआ। भगवान् धन्वन्तरि देवो  के  आयुर्वेद  चिकित्सक के रूप में भी जाना जाता है ।

Benefits

धन्वन्तरि त्रयोदशी (धनतेरस पर्व) का माहात्म्य:-

  • यह कार्तिक त्रयोदशी भगवान् धन्वंतरी  को समर्पित है ।  इस दिन भगवान् धन्वन्तरि की आराधना से गृह सम्बन्धी क्लेशों का शमन होता है।
  • इनकी पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त  होती है । 
  • दक्षिण दिशा में शाम के समय दीपक जलाने से यमदेव प्रसन्न होकर अकाल मृत्यु दोष का हरण कर लेते हैं ।
  • धन्वन्तरि देव के पूजन- अर्चन करने से मनोवाञ्छित फल  की प्राप्ति होती है।
  • आज के दिन  नूतन गाड़ी, बर्तन ,कपड़े आदि खरीदना शुभ होता है।
Process

धन्वन्तरि त्रयोदशी (धनतेरस पर्व) में  होने वाले प्रयोग या विधि

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा-सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. नवग्रह मण्डल पूजन
  10. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  11. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं पूजन 
  12. रक्षाविधान
Puja Samagri

वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2, कटोरी - 5, लोटा - 2, चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा, धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

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