मधुसूक्त

मधु सूक्त (मधुविद्या) पाठ एवं हवन

सूक्त पाठ एवं हवन | Duration : 4 Hours
Price Range: 5100 to 11000

About Puja

इस सूक्त का दर्शन अथर्ववेद के नवम् काण्ड में होता है। मधुविद्या के ऋषि अथर्वा तथा देवता अश्विनी कुमार एवं मधु हैं। इसमें विशेष रूप से गो महिमा को अभिव्यक्त किया गया है। दिव्य दैवीय शक्तियों से सम्पन्न यह अ‌द्भुत सूक्त है। गो दुग्ध की दिव्यता एवं  उत्कृष्टता का वर्णन किया गया है। जीवन में मधुरता एवं पति-पत्नी में समरसता की प्राप्ति के लिए इस सूक्त  के द्वारा  समाराधन एवं हवन किया जाता है। गौ के परम पूज्य भाव को भी मन्त्रों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है। इस मधुसूक्त का विद्वान् ब्राह्मणों के द्वारा पारायण से जीवन में माधुर्य का संचार होता है तथा सौभाग्य की भी अभिवृद्धि होती है।

Benefits

मधु सूक्त (मधुविद्या) पाठ एवं हवन का माहात्म्य :-

  • महामारी के त्रास से मुक्ति प्राप्त कराने वाला यह अनुपम सूक्त हैं।
  • इस सूक्त में गाय को मधुकशा  कहा गया है, तथा अग्नि, वायु एवं मरुद्गणों से मधुकशा की उत्पत्ति कही गयी है।
  • इस सूक्त की उपासना से अग्नि, वायु एवं अन्य देव भी परम प्रसन्न होकर अभ्युदय करते हैं।
  • मधुकशा धेनु द्वादश आदित्यों की जननी है तथा वसुओं की पुत्री कही गयी है।
  • अमृत की केन्द्र स्वरुपा धेनु का स्तवन करने वाले इस सूक्तों के पाठ से मनुष्यों में तेज का संचार होता है। 
  • सन्तति के अभ्युदय (उत्कर्ष) के लिए मधुविद्या अत्यन्त अनुकूल फलदायक हैं।
  • विद्यार्थियों की बुद्धि विकाश के लिए मधुसूक्त का पारायण विद्वान् ब्राह्मणों द्वारा कराया जाता है।
  • व्रत एवं यज्ञ करने का फल मधुसूक्त के पाठ से प्राप्त होता है।
  • मधुसूक्त का विधिपूर्वक पारायण,व्यक्ति के आत्मबल को बढ़ाता है। लोक में ख्याति प्राप्ति हेतु इन मन्त्रों का विनियोग (प्रयोग) किया जाता है।
  • यह सूक्त जीवन में मङ्गल संचार करने के साथ ही उत्तम लोकों की प्राप्ति कराने वाला है।
  • परमेश्वर की कृपा प्राप्ति के साथ ही सन्तति (पुत्रादि)का अनुकूल व्यवहार होता है।
Process

मधु सूक्त (मधुविद्या) पाठ एवं हवन में होने वाले प्रयोग या विधि:-

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल , वास्तु पुरुष आवाहन एवं , पूजन 
  13. रक्षाविधान 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. पंचभूसंस्कार
  16. अग्नि स्थापन
  17. ब्रह्मा वरण 
  18. कुशकण्डिका
  19. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  20. घृताहुति
  21. मूलमन्त्र आहुति 
  22.  चरुहोम
  23. भूरादि नौ आहुति
  24.  स्विष्टकृत आहुति
  25. पवित्रप्रतिपत्ति
  26. संस्रवप्राशन 
  27. मार्जन
  28. पूर्णपात्र दान
  29. प्रणीता विमोक
  30. मार्जन 
  31. बर्हिहोम 
  32. पूर्णाहुति , आरती , भोग , विसर्जन  आदि
Puja Samagri

वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन सामग्री:-

  • रोली ,कलावा    
  • सिन्दूर  , लवङ्ग 
  • इलाइची , सुपारी 
  • हल्दी , अबीर 
  • गुलाल , अभ्रक 
  • गङ्गाजल , गुलाबजल 
  • इत्र , शहद 
  • धूपबत्ती  ,रुईबत्ती  , रुई 
  • यज्ञोपवीत , पीला सरसों 
  • देशी घी , कपूर 
  • माचिस , जौ 
  • दोना बड़ा साइज ,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन , लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन , गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला) , दीपक मिट्टी का 
  • सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य , सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न , मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती

हवन सामग्री एवं यज्ञपात्र :-

  • काला तिल 
  • चावल 
  • कमलगट्टा
  • हवन सामग्री, घी ,गुग्गुल
  • गुड़ (बूरा या शक्कर) 
  • बलिदान हेतु पापड़
  • काला उडद 
  • पूर्णपात्र -कटोरी या भगोनी
  • प्रोक्षणी , प्रणीता , सुवा, शुचि , स्फय - एक सेट
  • हवन कुण्ड ताम्र का 10/10  इंच या 12/12 इंच 
  • पिसा हुआ चन्दन 
  • नवग्रह समिधा
  • हवन समिधा 
  • घृत पात्र
  • कुशा
  • पंच पात्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 07
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  • थाली - 2 , कटोरी - 5 ,लोटा - 2 , चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • पानी वाला नारियल 
  • तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा , धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि

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