For Any Assistance

white-logo Call Us At +91 8282823568

(Timing: 10:00 AM - 07:00 PM)

white-logo Email Us

white-logo Whatsapp Us

सरस्वतीसूक्त

सरस्वती पूजा

व्रतोत्सव त्यौहार | Duration : 3 Hours 30 minute
Price : 11000

About Puja

माता सरस्वती ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना करने से अज्ञान रूपी अन्धकार का विनाश तथा सद्बुद्धि का विस्तृत विकास होता है। मां सरस्वती की उपासना अथवा अनुष्ठान किसी भी दिन भक्तियुक्त मन से किया जा सकता हैं,परन्तु माता सरस्वती की विशिष्ट कृपा प्राप्ति हेतु इनकी उपासना वसंत पंचमी के दिन करनी चाहिये। यह दिन माता के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, अत एव देवी सरस्वती इस दिन अपने भक्तों की उपासना से अतिशीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करती हैं। इस दिन सभी भक्तगण अपने घर, स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल पर मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं तथा वागेश्वरी देवी से अज्ञानता की परिसमाप्ति की कामना करते हैं और  ज्ञान मांगते हैं। इनकी उपासना से विद्याध्ययन में आ रही समस्त प्रकार की बाधाओं की निवृत्ति होती है तथा बुद्धि में प्रखरता आती है।  महर्षि आश्वलायन ने माता सरस्वती की उपासना के प्रभाव से तत्वज्ञान की प्राप्ति की। विद्यार्थियों की सुसुप्त मेधा को प्रकट करने वाली साक्षात् माता वाग्देवी सरस्वती हैं। इनके आठ स्वरूप हैं- वागीश्वरी, चित्रेश्वरी, कुलजा, कीर्तीश्वरी, अन्तरिक्ष- सरस्वती, घट-सरस्वती, किणि- सरस्वती। पूजा काल में इन सभी देवियों की नामोच्चारण पूर्वक उपासना होती है।

Benefits

सरस्वती पूजा  का माहात्म्य :-

  • माता सरस्वती की उपासना करने से जीवन में सफलता और तरक्की के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
  • बौद्धिक क्षमता का विकास होता है,तथा चित्त की चंचलता एवं मानसिक विकारों का परिहार होता है।
  • परिश्रम पूरा करने के बाद भी यदि आप परीक्षा में असफल हो रहे हैं तो वैदिक विधि से सरस्वती पूजा अवश्यक करानी चाहिए।
  • शिक्षा-क्षेत्र में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
  • विद्यार्थियों तथा उपासकों में उचित निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
  •  विस्मरण,अध्ययन में प्रमाद, दीर्घसूत्रता, पढ़ने में अरुचि आदि दुष्प्रवृत्तियां समाप्त होती हैं।
  • मां सरस्वती की पूजा उपासना से अध्ययन तथा अपने कार्यक्षेत्र में उन्नयन (विकास) होता है।
  • शास्त्रोक्त विधि से उपासना के द्वारा अष्टविध ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • विद्यार्थियों तथा परीक्षार्थियों को विषय स्मरण हो जाता है।
Process

सरस्वती पूजा में  होने वाले प्रयोग या विधि:-

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा-सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं पूजन 
  13. रक्षाविधान, 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. पाठ विधान
Puja Samagri

वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2, कटोरी - 5, लोटा - 2, चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा, धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

No FAQs Available

 +91 |

By clicking on Login, I accept the Terms & Conditions and Privacy Policy

Recovery Account