शिवाथर्वशीर्षम्

शिवाथर्वशीर्षम्

पंचदेव अथर्वशीर्षम् | Duration : 4 Hours
Price Range: 5100 to 6500

About Puja

"वेद: शिव: शिवो वेद:" वेद शिव हैं और शिव वेद हैं, अर्थात् शिव वेदस्वरूप हैं। वैदिक एवं पौराणिक वाङ्मय में भूतभावन भगवान्   चंद्रमौलीश्वर शिवशंकर की अपरिमित महिमा का प्रतिपादन हुआ है। ऋग्वेद में महादेव शिव को समस्त विद्याओं का स्वामी तथा जीवमात्र का नियन्ता कहा गया है।
 " ईशान:सर्वविद्यानामीश्वर: सर्वभूतानाम् "
  शिवपुराण में भगवान् स्वयं कहते हैं-
   अहं शिव:शिवश्चायं त्वं चाऽपि शिव एव हि।
    सर्वं शिवमयं ब्रह्मन् शिवात् परं न किञ्चन।।

     हे  ब्रह्मन् ! मैं शिव हूं, यह शिव है, तुम भी शिव ही हो, सब कुछ शिवमय है, शिव के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है।
   शिव और रुद्र ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं। शिव को रुद्र इसलिए कहा जाता है- ये ' रुत्' अर्थात् दुःखों का विनाश करते हैं।
      "रुतम् -दुःखम् ; द्रावयति नाशयतीति रुद्र:"।

Benefits

शिवाथर्वशीर्ष  पाठ माहात्म्य:-

  • समस्त अभीष्ट की प्राप्ति के लिए शिवाथर्वण सूक्त से शिवोपासना विशिष्ट है।
  • इस अथर्वशीर्ष में समस्त देवों द्वारा शिव तत्व की स्तुति की गई है।
  • यह  शिवाथर्वशीर्ष कल्याणकारी है एवं इस अथर्वशीर्ष द्वारा कल्याण के लिए ही उनकी उपासना की जाती है।
  • शिवाथर्व के पाठ से पाठक या पाठ कराने वाला अग्नि,वायु,सूर्य,और सोम से भी पवित्र हो जाता है।
  • समस्त तीर्थों में स्नान का तथा वेदों के ध्यान का फल प्राप्त होता है।
  • विधिपूर्वक  स्तवन   पाठ  से साठ हजार गायत्री मंत्र जप का, इतिहास तथा पुराणों के पाठ का फल प्राप्त होता है।
  • रुद्र (शिव )के एक लाख जप का फल 10000 प्रणव (ॐ) जप का फल उसे प्राप्त होता है।
  • पाठक और यजमान के दर्शन मात्र से अन्य मनुष्य पवित्र हो जाते हैं।
  • यजमान स्वयं तो मुक्त होता ही है, पूर्व की सात पीढ़ियों को भी मुक्त कर देता है।
  • शिवाथर्वशीर्ष के पाठ का अद्भुत फल है।
Process

शिवाथर्वशीर्षम्  में होने वाले प्रयोग या विधि-

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा-सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं पूजन 
  13. रक्षाविधान, 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. पाठ विधान
  16. विनियोग,करन्यास, हृदयादिन्यास
  17. ध्यानम्, स्तोत्र पाठ
  18. पंचभूसंस्कार, अग्नि स्थापन, ब्रह्मा वरण, कुशकण्डिका
  19. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  20. घृताहुति, मूलमन्त्र आहुति, चरुहोम
  21. भूरादि नौ आहुति स्विष्टकृत आहुति, पवित्रप्रतिपत्ति
  22. संस्रवप्राश, मार्जन, पूर्णपात्र दान
  23. प्रणीता विमोक, मार्जन, बर्हिहोम 
  24. पूर्णाहुति, आरती, विसर्जन
Puja Samagri

 वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री:-

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

हवन सामग्री एवं यज्ञपात्र :-

  • काला तिल 
  • जौ,चावल 
  •  कमलगट्टा, पंचमेवा 
  •  हवन सामग्री, घी,गुग्गुल
  • गुड़ (बूरा या शक्कर) ,गड़ी गोला 
  •  पान पत्ता, बलिदान हेतु पापड़
  • काला उडद 
  • पूर्णपात्र -कटोरी या भगोनी
  • प्रोक्षणी, प्रणीता, स्रुवा, शुचि, स्फय - एक सेट
  • हवन कुण्ड ताम्र का 10/10  इंच या 12/12 इंच 
  • कलश रखने के लिए मिट्टी का पात्र
  •  पिसा हुआ चन्दन 
  • नवग्रह समिधा
  •  हवन समिधा 
  •  घृत पात्र
  • कुशा
  • पंच पात्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2 , कटोरी - 5 ,लोटा - 2 , चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा , धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

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