बाबा विश्वनाथ की कृपा प्राप्ति कराने वाला श्री काशी विश्वेश्वर स्तोत्र

बाबा विश्वनाथ की कृपा प्राप्ति कराने वाला श्री काशी विश्वेश्वर स्तोत्र

।। श्री काशी विश्वेश्वरादि स्तोत्रम् ।। 

यह स्तोत्र श्लोकों का संग्रहात्मक स्तोत्र है । इस स्तोत्र में “काशी विश्वेश्वर” भगवान् के विभिन्न गुणों का गायन किया गया है । इस स्तोत्र का दैनिक पाठ करने से भगवान् विश्वनाथ में प्रीति तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है ।   

नमः श्रीविश्वनाथाय देववन्द्यपदाय ते ।
काशीशेशावतारो मे देवदेव ह्युपादिश ॥१॥ 

हे देवदेव ! आपने काशी में शासन करने के हेतु मंगलमूर्ति आचर शिव के रूप में अवतार लिया है। आप विश्व के नाथ हैं, देवता धारणा आपके चरणों की वन्दना करते हैं, आप मुझे उपदेश दें, आपको नमस्कार है ।

मायाधीशं महात्मानं सर्वकारणकारणम् । 
वन्दे तं माधवं देवं यः काशीं चाधितिष्ठति ॥२॥

जो माया के अधीश्वर हैं, महान् आत्मा हैं, सभी कारणों के जाने कारण हैं और जो काशी को सदा अपना अधिष्ठान बनाये हुए हैं, ऐसे उन भगवान् माधव को मैं प्रणाम करता हूँ ।

वन्दे तं धर्मगोप्तारं सर्वगुह्यार्थवेदिनम् ।
गणदेवं ढुण्ढिराजं तं महान्तं सुविघ्नहम् ॥३॥

जो बड़े-से-बड़े विघ्न को अनायास ही बिना किसी प्रकार का श्रम किये ही नष्ट कर देते हैं, धर्म के रक्षक और सभी गुहा (रहस्यपूर्ण) अर्थों के वेत्ता हैं, ऐसे उन महान् दुण्ढिराज गणपति को मैं प्रणाम करता हूँ ।

भारं वोढुं स्वभक्तानां यो योगं प्राप्त उत्तमम् ।
तं स ढुण्ढिं दण्डपाणिं वन्दे गङ्गातटस्थितम् ॥४॥

जिन्होंने अपने भक्तों का भार वहन करने के लिये उत्तम योग प्राप्त किया है, ऐसे गंगातट पर स्थित उन ढुण्ढिराज सहित भगवान् दण्डपाणि को मैं प्रणाम करता हूँ ।

भैरवं दंष्ट्राकरालं भक्ताभयकरं भजे ।
दुष्टदण्डशूलशीर्षधरं वामाध्वचारिणम् ॥५॥ 

बड़ी-बड़ी दाढ़ों वाले, भक्तों को अभय कर देने वाले, वाममार्ग का आचरण करने वाले, दुष्टों को दण्ड देने के लिये शूल तथा शीर्ष (कपाल) धारण करने वाले भगवान् भैरव को मैं प्रणाम करता हूँ ।

श्रीकाशीं पापशमनीं दमनीं दुष्टचेतसः । 
स्वर्निः श्रेणिं चाविमुक्तपुरीं मर्त्यहितां भजे ॥६॥ 

श्रीकाशी, पापों का शमन तथा दुष्टचित्त वालों का दमन करने वाली और स्वर्ग की सीढ़ी है। यह भगवान् शिव के द्वारा कभी न परित्याग किये जाने वाली है, (इसीलिये इसे 'अविमुक्तपुरी' कहा जाता है) मृत्युलोक के प्राणियों के लिये यह हितकारिणी है। इस पुरी का मैं सेवन करता हूँ ।

नमामि चतुराराध्यां सदाऽणिम्नि स्थितिं गुहाम् ।
श्री गङ्गे भैरवीं दूरीकुरु कल्याणि यातनाम् ॥७॥ 

विद्वानों द्वारा आराध्य, अणिमा ऐश्वर्य में स्थित गुहा को मैं नमस्कार करता हूँ । हे कल्याणस्वरूपिणी गंगे ! आप मेरी भैरवी यातना को दूर कर दें । 

भवानि रक्षान्नपूर्णे सद्वर्णितगुणेऽम्बिके ।
देवर्षिवन्द्याम्बुमणिकर्णिकां मोक्षदां भजे ॥८॥ 

हे अन्नपूर्णे, हे अम्बिके, हे सत्पुरुषों के द्वारा वर्णित गुणों वाली भवानि ! आप हमारी रक्षा कीजिये । देवताओं और ऋषियों द्वारा वन्द्य तथा समस्त संसार को मोक्ष प्रदान करने वाली जलमयी मणिकर्णिका का मैं सेवन करता हूँ ।

॥ इस प्रकार श्रीकाशीविश्वेश्वरादि स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ॥

वैदिक पद्धति से विशिष्ट पूजा-पाठ, यज्ञानुष्ठान, षोडश संस्कार, वैदिकसूक्ति पाठ, नवग्रह जप आदि के लिए हमारी साइट vaikunth.co पर जाएं तथा अभी बुक करें ।

Vaikunth Blogs

करती है सभी मनोकामनाओं की पूर्ति भगवान् शिव का यह बिल्वाष्टकम् स्तोत्र
करती है सभी मनोकामनाओं की पूर्ति भगवान् शिव का यह बिल्वाष्टकम् स्तोत्र

।। बिल्वाष्टकम् ।। भगवान् शिव को बिल्वपत्र अत्यन्त प्रिय है जो साधक एक लोटा जल के साथ इस स्तोत्र...

विकट विपत्ति तथा मृत्यु के समतुल्य कष्ट से मुक्ति हेतु करें महाकाल स्तुति
विकट विपत्ति तथा मृत्यु के समतुल्य कष्ट से मुक्ति हेतु करें महाकाल स्तुति

।। महाकाल स्तुति स्तोत्र ।।  भगवान् शिव के अनेकों नाम हैं । भक्त भिन्न-भिन्न नामों से इनका गुणगान...

त्रिविध तापों की शान्ति तथा सर्वदा रक्षा के लिए श्री शिव जटाजूट स्तुति
त्रिविध तापों की शान्ति तथा सर्वदा रक्षा के लिए श्री शिव जटाजूट स्तुति

।। श्री शिवजटाजूट स्तुति ।। भगवान् शिव की यह स्तुति तीन श्लोकों में की गयी है । इस स्तुति में साध...

विद्या प्राप्ति एवं रोग-व्याधि की निवृत्ति हेतु करें, यह शिव स्तुति
विद्या प्राप्ति एवं रोग-व्याधि की निवृत्ति हेतु करें, यह शिव स्तुति

।। अन्धककृत शिवस्तुति  ।।  श्री स्कन्दपुराण के अवन्तीखण्ड में अन्धककृत यह स्तुति की गयी है । इस स...

दुर्लभपद की प्राप्ति एवं व्यवसाय की उन्नति होती है, स्कन्दकृत शिव स्तुति से।
दुर्लभपद की प्राप्ति एवं व्यवसाय की उन्नति होती है, स्कन्दकृत शिव स्तुति से।

।। शिव स्तुति ।।  श्री स्कन्द पुराण के कुमारिका खण्ड में भगवान् शिव की यह मनोहर स्तुति प्राप्त हो...

षड्विकारों(काम, क्रोध,लोभ,मोह,ईर्ष्या,द्वेष) को शान्त करने वाला शिवषडक्षर स्तोत्र
षड्विकारों(काम, क्रोध,लोभ,मोह,ईर्ष्या,द्वेष) को शान्त करने वाला शिवषडक्षर स्तोत्र

 ।। शिवषडक्षर स्तोत्रम् ।। श्री रुद्रयामलतंत्र में उमा महेश्वर संवाद के अन्तर्गत् शिवषडक्षर स्तोत...

 +91 |

By clicking on Login, I accept the Terms & Conditions and Privacy Policy

Recovery Account