महान उत्पात, विघ्नबाधा तथा भय से मुक्ति हेतु करें उत्पात नाशन गणेश स्तोत्र

महान उत्पात, विघ्नबाधा तथा भय से मुक्ति हेतु करें उत्पात नाशन गणेश स्तोत्र

।। उत्पातनाशन गणेश स्तोत्र ।।

भगवान् गणेश समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं तथा शुभ फल को साधकों को प्रदान करने वाले हैं । इनकी महिमा का वर्णन हमें अनेकों ग्रन्थों और पुराणों में प्राप्त होता है, उन्हीं में से एक समस्त उत्पातों के नाश के लिए  “श्रीगणेशपुराण” में वर्णित “उत्पातनाशनगणेशस्तोत्र” है । इस स्तोत्र पाठ से समस्त उत्पातों का विनाश होता है । 

इस स्तोत्र के पाठ से उपासक को  त्रिविध तापों से राहत प्राप्त होती है तथा भगवान् गणेश स्वयं इस स्तोत्र का पाठ करने वाले साधक की रक्षा करते हैं ।  

नाथस्त्वमसि देवानां मनुष्योरगरक्षसाम् ॥१॥

यक्षगन्धर्वविप्राणां गजाश्वरथपक्षिणाम् ।
भूतभव्यभविष्यस्य बुद्धीन्द्रियगणस्यच ॥२॥

हर्षस्य शोकदुःखस्य सुखस्य ज्ञानमोहयोः ।
अर्थस्य कार्यजातस्य लाभहान्योस्तथैव च ॥ ३॥

स्वर्गपाताललोकानां पृथिव्या जलधेरपि । 
नक्षत्राणां ग्रहाणां च पिशाचानां च वीरुधाम् ॥४॥

वृक्षाणां सरितां पुंसां स्त्रीणां बालजनस्य च । 
उत्पत्तिस्थितिसंहारकारिणे ते नमो नमः ॥५॥

[ हे प्रभो ! ] आप देवता, मनुष्य, नाग, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, विप्र, गज, अश्व, रथ, पक्षी, भूत, वर्तमान, भविष्य, बुद्धि, इन्द्रियसमूह, हर्ष, शोक, दुःख, सुख, ज्ञान, मोह, अर्थ, समस्त कार्य, लाभ, हानि, स्वर्ग तथा पाताल आदि लोक, पृथ्वी, समुद्र, नक्षत्र, ग्रह, पिशाच, वनस्पति, वृक्ष, नदी, पुरुष, स्त्री एवं बालक-इन सभी के स्वामी हैं । सृष्टि, पालन तथा संहार करने वाले प्रभु आप [गणेश] को मेरा बारम्बार  नमस्कार है ।

पशूनां पतये तुभ्यं तत्त्वज्ञानप्रदायिने । 
नमो विष्णुस्वरूपाय नमस्ते रुद्ररूपिणे ॥ ६॥

[ जीवरूपी ] पशुओं के पति तथा तत्त्वज्ञान प्रदान करनेवाले आपको नमस्कार है । विष्णुस्वरूप तथा रुद्रस्वरूप प्रभु आपको मेरा नमस्कार है ।

नमस्ते ब्रह्मरूपाय नमोऽनन्तस्वरूपिणे । 
मोक्षहेतो नमस्तुभ्यं नमो विघ्नहराय ते ॥७॥

ब्रह्मस्वरूप आपको नमस्कार है । अनन्तस्वरूप आपको नमस्कार है । हे मोक्षहेतो ! (मोक्ष को प्रदान करने वाले) आपको नमस्कार है । विघ्नों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है ।

नमोऽभक्तविनाशाय नमो भक्तप्रियाय च । 
अधिदैवाधिभूतात्मंस्तापत्रयहराय ते ॥ ८ ॥ 

अभक्तों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है तथा भक्तों के लिये प्रिय आपको नमस्कार है ।

सर्वोत्पातविघाताय नमो लीलास्वरूपिणे । 
सर्वान्तर्यामिणे तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय ते नमः ॥ ९ ॥ 

हे प्रभु ! आप‌ आधिदैविक, आधिभौतिक तथा आध्यात्मिक- इन तीनों प्रकार के तापों का हरण करने वाले आपको नमस्कार है । समस्त उपद्रवों का नाश करने वाले तथा लीलास्वरूप आपको नमस्कार है । आप सर्वान्तर्यामी को नमस्कार है । आप सर्वाध्यक्ष को नमस्कार है ।

अदित्या जठरोत्पन्न विनायक नमोऽस्तु ते। 
परब्रह्मस्वरूपाय नमः कश्यपसूनवे ॥ १० ॥

देवी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हे विनायक ! आपको नमस्कार है । आप परब्रह्मस्वरूप कश्यपपुत्र को नमस्कार है ।

अमेयमायान्वितविक्रमाय मायाविने मायिकमोहनाय ।
अमेयमायाहरणाय माया- महाश्रयायास्तु नमो नमस्ते ॥ ११॥

अपरिमित माया से सम्पन्न पराक्रम वाले, मायास्वरूप, मायावियों को भी मोहित कर देने वाले, अपरिमेय माया का हरण कर लेने वाले तथा महामाया के आश्रयस्वरूप आपको बार-बार नमस्कार है । 

य इदं पठते स्तोत्रं त्रिसंध्योत्पातनाशनम् ।
न भवन्ति महोत्पाता विघ्ना भूतभयानि च॥१२॥

जो [मनुष्य] तीनों सन्ध्याकालों में उपद्रवों का नाश करने वाले इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे महान् उत्पात, विघ्न तथा भूत-प्रेत जनित भय नहीं होता ।

त्रिसंध्यं यः पठेत् स्तोत्रं सर्वान् कामानवाप्नुयात्। 
 विनायकः सदा तस्य रक्षणं कुरुतेऽनघ ॥ १३॥

जो तीनों सन्ध्याओं में इस स्तोत्र को पढ़ता है, वह समस्त वांछित फल प्राप्त करता है और हे अनघ ! विनायक गणेश सदा उसकी रक्षा करते हैं । 

॥ इति श्रीगणेशपुराणे उत्पातनाशनगणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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