आयुष्य dev

आयुष्य पूजा एवं होम

वैदिक यज्ञ एवं होम | Duration : 3 Hours 30 minutes
Price : 5100

About Puja

देवता को उद्देश्य पूर्वक मुख्य रूप से हविर्द्रव्य के प्रक्षेपात्मक त्याग को होम कहते हैं। होम का लक्षण इस प्रकार है। 'उपविष्ट होमाः स्वाहाकार प्रदानाः जुहोतयः ।' ( कात्यायनश्रौतसूत्र 2/1/7) ' जिस क्रिया विशेष में बैठकर स्वाहाकार पूर्वक हविर्द्रव्य को अग्नि के लिए समर्पित किया जाए, उसे होम कहते है।'     

आयुष् शब्द का अर्थ आयु (उम्र) होता है। आयुष्य पूजा स्वास्थ्य रक्षण पूर्वक आयु की वृद्धि के उद्देश्य से सम्पन्न किया जाता है। सामान्य तथा असाध्य रोगों को दूर कर सरस सरल एवं सुखकर जीवन को बनाने के लिए तथा साथ ही दीर्घायु प्राप्ति के उद्देश्य से आयुष्य पूजा अथवा होम का सङ्कल्प लिया जाता है। आयुष्य होम के द्वारा मरुद्गण, पूषा, बृहस्पति, अग्नि, आदित्य, इन्द्र, प्राण, ऋषिगण, गन्धर्व, अप्सराएँ, भग, पृथ्वी, द्युलोक, अन्तरिक्ष, दिशा, प्रदिशाएँ, धान्य, ओषधियां, नदी, सिन्धु, समुद्र, जल आदि समस्त अधिदेवता स्वास्थ्य का रक्षण करते हुए आयु प्रदान करते हैं। प्रजा (पुत्रादि) की प्राप्ति, और धन की वृष्टि भी आयुष्य हवन से होता है तथा उपरोक्त देवताओं से प्रार्थना की जाती है।  घर में बालक, बालिक, माता, पिता, पति, पत्नी आदि कोई भी यदि लम्बे समय से बिमार हो तो आयुष्य पूजा एवं हवन जरूर कराना चाहिए। वैसे भी वर्ष में एक बार आयुष्य होम विधिपूर्वक वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा सम्पन्न करानी चाहिए, जिसका मुख्य फल आधि, व्याधि, रोग, दुःख, पीडा, संताप का निरसन तो होता ही है,आनुषङ्गिक फल शुद्धता पवित्रता तथा गृह की उन्नति होती है। आयुष् पूजा एवं हवन विशेषतः जन्म नक्षत्र में करें या प्रति महीने स्वास्थ्य की दृष्टि से कराया जा सकता है।

Benefits

आयुष्य पूजा एवं हवन माहात्म्य :-

  • यह पूजा जिसके निमित्त करायी जा रही है उसके जन्म नक्षत्र पर करानी चाहिए | पूजा से पूर्व जन्म कुण्डली का विवेचन भी करानी चाहिए। 
  • आयुष्य पूजा एवं हवन जिस व्यक्ति के उद्देश्य से किया जा रहा है, उसका स्वास्थ्य और जीवनी शक्ति सर्वोत्तम होती है। 
  • घर परिवार में क्लेशों की शान्ति तथा मधुरता का संचार होता है।
  • ग्रहों से होने वाली समस्याओं से शान्ति मिलती है तथा हानिकारक ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
  • स्वास्थ्य की रक्षा तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  • पूर्वजन्म के तथा वर्तमान के पापों का प्रक्षालन के साथ ही अभ्युदय की प्राप्ति कराता है।
  • अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा सर्वव्याधियों की निवृत्ति आयुष्य पूजा एवं हवन का विशेष फल है।
Process

आयुष्य पूजा एवं होम में  होने वाले प्रयोग या विधि:-

  1. स्वस्तिवाचन एवं शान्तिपाठ
  2. प्रतिज्ञा-सङ्कल्प
  3. गणपति गौरी पूजन
  4. कलश स्थापन एवं वरुणादि देवताओं का पूजन
  5. पुण्याहवाचन एवं मन्त्रोच्चारण अभिषेक
  6. षोडशमातृका पूजन
  7. सप्तघृतमातृका पूजन
  8. आयुष्यमन्त्रपाठ
  9. सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध (आभ्युदयिकश्राद्ध)
  10. नवग्रह मण्डल पूजन
  11. अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता आवाहन एवं पूजन
  12. पञ्चलोकपाल,दशदिक्पाल, वास्तु पुरुष आवाहन एवं पूजन 
  13. रक्षाविधान, 
  14. प्रधान देवता पूजन
  15. पाठ विधान
  16. विनियोग,करन्यास, हृदयादिन्यास
  17. ध्यानम्, स्तोत्र पाठ
  18. पंचभूसंस्कार, अग्नि स्थापन, ब्रह्मा वरण, कुशकण्डिका
  19. आधार-आज्यभागसंज्ञक हवन
  20. घृताहुति, मूलमन्त्र आहुति, चरुहोम
  21. भूरादि नौ आहुति स्विष्टकृत आहुति, पवित्रप्रतिपत्ति
  22. संस्रवप्राश , मार्जन, पूर्णपात्र दान
  23. प्रणीता विमोक, मार्जन, बर्हिहोम 
  24. पूर्णाहुति, आरती, विसर्जन
Puja Samagri

वैकुण्ठ के द्वारा दी जाने वाली पूजन  सामग्री

  • रोली, कलावा    
  • सिन्दूर, लवङ्ग 
  • इलाइची, सुपारी 
  • हल्दी, अबीर 
  • गुलाल, अभ्रक 
  • गङ्गाजल, गुलाबजल 
  • इत्र, शहद 
  • धूपबत्ती,रुईबत्ती, रुई 
  • यज्ञोपवीत, पीला सरसों 
  • देशी घी, कपूर 
  • माचिस, जौ 
  • दोना बड़ा साइज,पञ्चमेवा 
  • सफेद चन्दन, लाल चन्दन 
  • अष्टगन्ध चन्दन, गरी गोला 
  • चावल(छोटा वाला), दीपक मिट्टी का 
  • पानी वाला नारियल, सप्तमृत्तिका 
  • सप्तधान्य, सर्वोषधि 
  • पञ्चरत्न, मिश्री 
  • पीला कपड़ा सूती, तांबा या पीतल का कलश ढक्कन सहित  
  • पंचगव्य गोघृत, गोमूत्र

हवन सामग्री एवं यज्ञपात्र :-

  • काला तिल 
  • जौ,चावल 
  •  कमलगट्टा, पंचमेवा 
  •  हवन सामग्री, घी,गुग्गुल
  • गुड़ (बूरा या शक्कर) ,गड़ी गोला 
  •  पान पत्ता, बलिदान हेतु पापड़
  • काला उडद 
  • पूर्णपात्र -कटोरी या भगोनी
  • प्रोक्षणी, प्रणीता, स्रुवा, शुचि, स्फय - एक सेट
  • हवन कुण्ड ताम्र का 10/10  इंच या 12/12 इंच 
  • कलश रखने के लिए मिट्टी का पात्र
  •  पिसा हुआ चन्दन 
  • नवग्रह समिधा
  •  हवन समिधा 
  •  घृत पात्र
  • कुशा
  • पंच पात्र

यजमान के द्वारा की जाने वाली व्यवस्था:-

  • वेदी निर्माण के लिए चौकी 2/2 का - 1
  • गाय का दूध - 100ML
  • दही - 50ML
  • मिष्ठान्न आवश्यकतानुसार 
  • फल विभिन्न प्रकार ( आवश्यकतानुसार )
  • दूर्वादल (घास ) - 1मुठ 
  • पान का पत्ता - 11
  • पुष्प विभिन्न प्रकार - 2 kg
  • पुष्पमाला - 7 ( विभिन्न प्रकार का)
  • आम का पल्लव - 2
  • विल्वपत्र - 21
  • तुलसी पत्र -7
  • शमी पत्र एवं पुष्प 
  •  थाली - 2, कटोरी - 5, लोटा - 2, चम्मच - 2 आदि 
  • अखण्ड दीपक -1
  • देवताओं के लिए वस्त्र -  गमछा, धोती  आदि 
  • बैठने हेतु दरी,चादर,आसन 
  • गोदुग्ध,गोदधि,गोबर

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